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मंगलवार, 20 जनवरी 2009

गहलोत ने साधा वसुंधरा-बैंसला पर निशाना


जोधपुर । मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे व कर्नल किरोडीसिंह बैंसला गुर्जर आरक्षण के नाम पर वैमनस्य फैलाने का षड्यंत्र रच रहे हैं। गुर्जर समाज को उसका हक मिले, इस पर किसी को ऎतराज नहीं है, लेकिन इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया से ही कुछ किया जा सकता है। 
गहलोत ने सोमवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भाजपा अपनी हार पचा नहीं पा रही है। इसलिए पूर्व मुख्यमंत्री व कर्नल बैंसला घिनौना षड्यंत्र रच रहे हैं, लेकिन जनता इसे समझ चुकी है। गहलोत ने कहा कि अफसोस की बात है कि सेना में कर्नल रह चुके बैंसला के नेतृत्व में इतने बडे पैमाने पर हिंसा हो गई। 
जिस सरकार की वजह से समाज के 71 लोग मरे, विधानसभा चुनाव में उसके समर्थन में बैंसला की अपील जारी हुई। अब भी जो किया जा रहा है, उसे जनता समझ रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जातियों में संघर्ष के षड्यंत्र को सफल नहीं होने देगी। सरकार कोशिश कर रही है कि पिछले आन्दोलन के दौरान मीणा व गुर्जर समाजों के बीच आई दरार मिटे। दोनों के बीच नजदीकियां बढे और दोनों ही जातियां भाईचारे से रह सके।
भ्रष्टाचार की जांच शीघ्र
गहलोत ने कहा कि पूवसरकार के वक्त हुए भ्रष्टाचार की जांच का काम शीघ्र शुरू किया जाएगा। जांच के लिए आयोग बनाने की बजाय मुकदमे दर्ज करने के पूर्व उप राष्ट्रपति भैंरोसिंह शेखावत के बयान पर उन्होंने कहा कि सभी को अपनी बात कहने का हक है। सरकार सभी विचारों को ध्यान में रखकर फैसले करती है। उन्होंने दोहराया कि सरकार बदले की भावना से कोई कदम नहीं उठाएगी, बल्कि सभी पहलुओं की जांच कर सच्चाई सामने लाएगी, कार्रवाई करना कानून और न्यायपालिका का काम है। 
कमी पिछली बार भी नहीं थी
कांग्र्रेस घोषणा पत्र को सरकारी दस्तावेज के तौर पर लागू करने के बावजूद 2003 में कांग्र्रेस की करारी हार के सवाल पर उन्होंने कहा कि कमी पिछली बार भी नहीं रखी थी और इस बार भी नहीं रखेंगे। वे बोले- "हमनें जो कहा है, करके दिखाएंगे।" 
नरेगा के लिए मॉनिटरिंग
मुख्यमंत्री ने बताया कि केन्द्र प्रवर्तित नरेगा के सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार मॉनिटरिंग कमेटी का गठन करेगी, ताकि वास्तविक लोगों तक योजना का लाभ पहुंच सके।
रिफाइनरी के लिए नए सिरे से बात
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि बाडमेर में रिफाइनरी के मुद्दे पर पूर्व सरकार की तरह राजनीति करने की बजाय केन्द्र से नए सिरे से बात कर रही है। यह मुद्दा कांग्र्रेस के घोषणा पत्र में शामिल है और इसके अनुरूप कोई कसर नहीं छोडी जाएगी। 
गहलोत ने सोमवार सुबह यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हाल ही उन्होंने पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवडा से बात की है और नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है।
बिजली उत्पादन पर जोर
गहलोत ने कहा कि बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए सार्वजनिक क्षेत्र में 1350 मेगावाट की चार इकाइयां छबडा व सूरतगढ तथा निजी क्षेत्र में 1320 मेगावाट की इकाई बांसवाडा में लगाई जा रही है। इसके लिए कंसलटेंट की नियुक्ति की जा चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि गत सरकार की लापरवाही से महंगी बिजली खरीदने में तीन हजार करोड रूपए बर्बाद हो गए।
बदलेगी आबकारी नीति
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की आबकारी नीति में बदलाव किया जाएगा, ताकि यहां शराब के नशे को प्रोत्साहन की बजाय हतोत्साहित किया जा सके। शराब की दुकानें कम करने के साथ शराब के विज्ञापनों पर अंकुश व देशी-विदेशी मदिरा की बिक्री एक ही दुकान पर सुनिश्चित की जाएगी।
न्याय अवश्य मिलेगा
मेहरानगढ दुखान्तिका की जांच के सवाल पर गहलोत ने कहा कि उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पीडितों को न्याय अवश्य मिलेगा।
मेटी करेगी निर्णय
आईआईटी, आईआईएम, केन्द्रीय विवि व विश्व स्तरीय विवि जैसी उच्च शिक्षण संस्थाओं के बारे में सरकार कमेटी बनाकर ही कोई निर्णय करेगी। केन्द्रीय विवि पर जोधपुर के दावे के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसके लिए पहली आवाज खुद उन्होंने उठाई थी। 

बुधवार, 24 दिसंबर 2008

राजस्थान में 8 बजे बंद होंगी शराब की दुकानें


जयपुर। राजस्थान में अब शराब की दुकानें रात 8 बजे ही बंद होंगी। राजस्थान की नवनिर्वाचित अशोक गहलोत सरकार ने शराब की दुकानों के लिए नई समय सारणी जारी की है। इस सारणी के अनुसार राज्य भर में सुबह नौ बजे से रात 11 बजे की जगह अब शराब की बिक्री सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक ही की जाएगी। सूत्रों के अनुसार आबकारी विभाग ने यह आदेश आज से ही लागू कर दिया है। वहीं, होटल बार और रेस्तरां बार के समय में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। रेस्तरां बारों में रात 11 बजे तक शराब मिलेगी। जबकि होटल के बारों में 24 घंटे उपलब्ध रहेगी। 

सोमवार, 22 दिसंबर 2008

आबकारी नीतियों में हो सकता बदलाव

Dec 21, 11:23 pm
जयपुर, चुनावों के दौरान पिछली भाजपा सरकार की आबकारी नीति एक बड़ा मुद्दा थी व कांग्रेस ने इसको लेकर सरकार पर हमले किए थे। नई सरकार इस आबकारी नीति को जल्दी ही बदलना चाहेगी, लेकिन यह काम काफी कठिन होगा। शराब पर आबकारी कर के माध्यम से सरकार को सर्वाधिक 17 सौ करोड़ रुपये की वार्षिक आय होती है। इससे शराब नीति को ढंग से बनाया गया, उसमें राज्य में शराब की दुकानों में काफी वृद्धि हो गई। सामान्यत: अगले वित्ता वर्ष के लिए शराब के ठेकों के आवंटन का काम जनवरी में आरंभ हो जाता है व फरवरी तक अधिकांश लाइसेंस आदि जारी कर दिए जाते हैं। चूंकि वर्तमान स्थिति को बदलने के लिए वर्तमान शराब नीति में आमूलचूल परिवर्तन किया जाना जरूरी है। इसलिए इस काम को अगर तुरंत करने की दिशा में कदम नहीं उठाए गए तो सरकार के पास अपनी नई आबकारी नीति को लागू करने का अधिक समय नहीं होगा। चूंकि वर्तमान सरकार नीतिगत निर्णय केवल विश्वास का मत प्राप्त करने के बाद ही ले सकेंगी, इसलिए यह समय अवधि और भी कम हो जाएगी। चूंकि लोकसभा चुनाव अप्रैल में होने की संभावना है, इसलिए आचार चुनाव संहिता फरवरी के अंत तक लागू हो जाएगी। ऐसी स्थिति में सरकार कोई बड़ा नीतिगत फैसला नहीं कर पाएगी। समझा जाता है नई सरकार ने विभाग के अधिकारियों को ऐसी नई आबकारी नीति के प्रस्ताव तैयार करने को कहा है जिससे शराब की बिक्री को प्रोत्साहन नहीं मिलता हो, पर इसके साथ सरकार को यह भी देखना है कि इस मद से होने वाली आय ज्यादा कम नहीं हो। चूंकि बिक्री तथा ऐसे करों की दरों में लगातार कमी से राजस्व में कमी आती दिख रही है, इसलिए सरकार आबकारी मद के राजस्व आय में ज्यादा कमी करने की स्थिति में नहीं है।